KULGEET
||कुलगीत ||
सहज पावन दिव्य भावन
नव नित-नित मनलू भावन
ज्ञान प्रज्ञा तम नसावन
राजपथ पर अतिसुहावन
सुगम साधन सुलभ घावन
ज्ञान आभा से विभासित
यह हमारा ज्ञान मंदिर।
गोरक्ष की पावन धरा से
ज्ञान प्रज्ञा प्रखर प्रतिभा
दास कबीर मगहरा के
मध्यस्थित नतिदूरे
अचिर-आमी पुण्य सलिला
ज्ञान आशा से विभासित
यह हमारा ज्ञान-मंदिर।।
डोहरिया की शान इसमें
बिसमिले अरमान इसमें
उद्योग पावन धरा में
देशरक्षा के प्रति समर्पित
सुलभ वीर जवान इसमें
ज्ञान-आभा से विभासित
यह हमारा ज्ञान मंदिर।
ज्ञान पाओ तम भगाओ
मनुर्भव समदृष्टि लाओ
ज्ञान का दीपक जलाकर
तम मिटाना लक्ष्य प्यारा
ज्ञान की आशा विभासित
यह हमारा ज्ञान मंदिर।।
प्रकृति है सुषमा यहाँ है
ज्ञान है गरिमा यहाँ है
सत्य ऋत सर्वधर्म समता
छात्रहित ममता यहाँ है
सततसाधन पूतपावन
ज्ञान की आभा विभासित
यह हमारा ज्ञान मंदिर।
-रचयिता- डॉ ० राम परसन तिवारी